Nasha ।। Kahin Ankahee ।। EP 48
Artikel konnten nicht hinzugefügt werden
Der Titel konnte nicht zum Warenkorb hinzugefügt werden.
Der Titel konnte nicht zum Merkzettel hinzugefügt werden.
„Von Wunschzettel entfernen“ fehlgeschlagen.
„Podcast folgen“ fehlgeschlagen
„Podcast nicht mehr folgen“ fehlgeschlagen
-
Gesprochen von:
-
Von:
Über diesen Titel
Written by- Munshi Premchand
Narrated by- Barsha Jha
मैंने उसे कभी गर्म होते नहीं देखा। शायद इसका कारण यह था कि वह अपने पक्ष की कमज़ोरी समझता था। नौकरों से वह सीधे मुँह बात नहीं करता था। अमीरों में जो एक बेदर्दी और उद्दंडता होती है, इसमें उसे भी प्रचुर भाग मिला था। नौकर ने बिस्तर लगाने में ज़रा भी देर की, दूध ज़रूरत से ज़ियादा गर्म या ठंडा हुआ, साइकिल अच्छी तरह साफ़ नहीं हुई, तो वह आपे से बाहर हो जाता। सुस्ती या बदतमीजी उसे ज़रा भी बरदाश्त न थी, पर दोस्तों से और विशेषकर मुझसे उसका व्यवहार सौहार्द और नम्रता से भरा हुआ होता था। शायद उसकी जगह मैं होता, तो मुझमें भी वही कठोरताएँ पैदा हो जातीं, जो उसमें थीं, क्योंकि मेरा लोकप्रेम सिद्धांतों पर नहीं, निजी दशाओं पर टिका हुआ था, लेकिन वह मेरी जगह होकर भी शायद अमीर ही रहता, क्योंकि वह प्रकृति से ही विलासी और ऐश्वर्य-प्रिय था।