• Aasmaan ko kabhi niche men thikana n mila ghazal writing and vocal Deepak mahapatre
    Sep 8 2022
    music produced arranged mixed and mastered and background voice by- sameer malhotra
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    3 Min.
  • Abhi housle se mulaqaat hai||Deepak Mahapatre||Haal-e-zubaan
    Jul 18 2021
    Voice & writing by - Deepak Mahaptre music produced arranged mixed and mastered by- sameer malhotra.
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    3 Min.
  • Zamaana (Haal-e-zubaan) {Deepak mahapatre}
    May 25 2021
    Music by - sameer malhotra. Writing and voice by Deepak mahapatre.
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    4 Min.
  • Zindagi {saanson ki sachchai} Haal e zubaan ,Deepak mahapatre
    Mar 27 2021
    Zindagi ke pahlu .......
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    4 Min.
  • Masarrat - Deepak mahapatre (Haal-e-zubaan)
    Jan 1 2021
    Written by and voice - Deepak mahapatre.. मसर्रत ये तुमारी कुर्बत ये मेरे मोहब्बत जवां रहे, खिलखिलाती बस्ती मेरी मसर्रत रवां रहे, कुछ बातें रिवायती कुछ बातें पुरानी रहे, ज़िन्दगी की एक साल की और एक कहानी रहे, उड़ गए परिंदे अपने नए ठिकाने पर हौसले पुराने बातें ले नए जमाने पर, आज भी याद है मुझे वो किस्से बचपन के शरारती दौर माँ के थपकियाँ बचपन के, रातों के नींद में ख़्वाब बड़े सच्चे थे, कच्ची रेत पर झिलमिलाती महल अच्छे थे, मसर्रत अक्षर ढेला स्याही में था, कागज़ की कश्ती पक्के सुराही में था, चिलचिलाती धूप नंगे पैर वो आम कच्चे थे बड़ा उम्र याद करते हैं कभी हम भी बच्चे थे, बड़े प्यार से संझौता हूं में अपनी किए बेमानी को इन मसरूफ़ भीड़ में भूल जाता हूँ मैं अपनी कहानी को, बड़े सान ए शौक़त से मानता हूँ अपनी बीती ज़िन्दगानी को उठे धुएं दीपक तले मौत आग़ोश रवानी को। Keep Listening - Spotify - https://open.spotify.com/episode/5wd224sRT2lXlEd1uwgzi5?si=XpyUcfssQiOi3mJo4xtGCQ Jio savan - https://www.saavn.com/s/show/Haal-e-zubaan-Deepak-Mahapatre-/1/Lamhan---Haal-e-zubaan-Deepak-mahapatre/ulBGgZokrvE_ Google podcasts - https://podcasts.google.com/?feed=aHR0cHM6Ly9hbmNob3IuZm0vcy8zMGYyYWE2NC9wb2RjYXN0L3Jzcw&ep=14&episode=MDMyYzA2ZGYtNjMxMS00OWNiLTgyY2EtZDQxMjY0OWVmNGQ2 Radiopublic - https://radiopublic.com/haal-e-zubaan-deepak-mahapatre-G1ednD Pocket cast - https://pca.st/fge2iw56 Overcast - https://overcast.fm/itunes1532663901/haal-e-zubaan-deepak-mahapatre Breakeraudio- https://www.breaker.audio/haal-e-zubaan-deepak-mahapatre Anchor - https://anchor.fm/deepak-mahapatre Follow on Instagram - https://instagram.com/deepakmahapatre?igshid=169d6e8zek7le Facebook - https://www.facebook.com/deepak.mahapatre.7 Twitter - https://twitter.com/mahapatr_deepak?s=09 Follow my thoughts on the YourQuote app at https://www.yourquote.in/deepakmahapatre1411 Nojato - Follow more such stories on @Nojotoapp Connect with me on Nojoto: https://nojoto.page.link/vUsc #shaayri #haalezubaan #poetry *Thank you*
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    3 Min.
  • Lamhan - Haal e zubaan Deepak mahapatre
    Dec 18 2020
    Written by Deepak mahapatre. लम्हा कुछ बिछड़े लम्हों का सफ़र अल्फ़ाज़ों का दौर लम्हां था गुज़र गया, जो साथ था वो बिछड़ गया, ख़्वाबों के शहर में वो रोज़ आता था,मोहब्बत था सुधर गया, इन आसमानों के तारों में जो बिजली चलती है चन्द बारिशों के बूंदो में मोहब्बत बरस गया, ठहरता गया लम्हा उनके एक एक नज़र के वार से उन्होंने मुस्कुरा कर जो देखा ये गुस्ताख़ दिल बिगड़ गया, निहारता रहा उनकी बिंदी को कोई मर्तवा उन्हीने नजरें शर्मा कर झुकाया नब्स वहीं फ़िसल गया, हाथ थाम लेता गर जमाने का डर ना होता दूर से देख उन्होंने आहें भर ली बेचैन दिल वहीं संभल गया, आज भी नींद करवटें बदल बदल कर लेता हूँ तुझे मिला लम्हां से नींद वहीं पिछड़ गया, ए दीपक इस मोहब्बत ने तुझे अंधेरे के सिवाए दिया क्या तूने रखा आँचल उनके दामन का हर रोज याद बदल गया।
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    3 Min.
  • Matlab (Haal e zubaan) (Deepak mahapatre)
    Nov 13 2020
    Written and vocal by Deepak mahapatre. मतलब मतलब से बना था जग मेरा मतलब से ठहरा था साथ मेरा तेरा, मतलब से बंधी थी तेरी मेरी यारी ख़ामख़ा ढूंढने लगा था तुझमें जग सारा, मतलब तन्हाई में ढूंढता था जो हर वक़्त तुमको ख़ुदग़र्ज़ में दब गया ये दिल बेचारा, मतलब ही था जो बन्धा हमको मतलब ही ने दिया एक दूजे को सहारा, मतलब ने तोड़ी हमारी रिश्ते कहानियां टूट गयी सारी कसमें जीत मन दिल हारा, मतलब बिखराती गयी एक के बाद एक सांसे मीठे समन्दर में ए दीपक तेरा मन ही खारा । मतलब से बना जग मेरा तेरा........
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    3 Min.
  • Be-zubaan (insaaniyat kaa ant).{Haal e zubaan}
    Nov 9 2020
    Written and voice by Deepak mahapatre. बे-ज़ुबान जो कभी किस्से थे आज वो कहानियां बन गए, जो कभी दिल-ए-अल्फ़ाज कहते थे वो बेज़ुबान बन गए, जिनका कभी राज होता था इन आसमानो में वो चन्द दानो के मेहरबान हो गए, वो बेज़ुबान बन गए, दादी सुनाती थी राजा रानी परिंदों की कहानियां कहानियों में अब इंसान हैवान बन गए,वो बे-ज़ुबान बन गए, चहकते लाली सुन रह गए, निल गगन अब धुंध रह गए ना करो पूजा ,ना करो फ़रियाद तुम ही सैतान हैवान बन गए, वो बेज़ुबान बन गए, तड़प उठी रूह, नन्ही जान तड़प देखा, बे-जान पंखों को मैने फेंकते देखा डर,दर्द हैवानियत से कांप उठी थी वो, ये इंसान तूम भी कैसे बे जान बन गए, चहकते नन्ही जान बे-ज़ुबान बन गए, जिनका कभी ये आसमाँ था, रौंद आंखें ये सियाह हो गए जल गई पंखें ये मुर्शित टूट ग़ुरबत बे जान बन गए, वो बे-ज़ुबान बन गए, चुभते दानों को डाल लेते हो बड़े तस्वीरें जो कभी तुम्हारा था नही वो दे तुम कर्ज़दान बन गए, वो बे-ज़ुबान बन गए इस चमकते महफ़िल का ए दीपक मैं भी तो एक गुलदान हूँ इन महफिलों का परोंदें-ए-दर देख रोशनदान बन गए, वो बे-ज़ुबान बन गए।
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    3 Min.