एपिसोड 1: कोई फ़्लोर नहीं - रियलिटी की रीवायरिंग Titelbild

एपिसोड 1: कोई फ़्लोर नहीं - रियलिटी की रीवायरिंग

एपिसोड 1: कोई फ़्लोर नहीं - रियलिटी की रीवायरिंग

Jetzt kostenlos hören, ohne Abo

Details anzeigen

Über diesen Titel

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि वास्तविकता किसी ठोस आधार पर टिकी होती है -

सत्य, तर्क, ईश्वर, विज्ञान, पहचान।

यह एपिसोड उसी मान्यता पर सीधा प्रहार है।

हम यह जाँचते हैं कि इंसानी दिमाग़ को “आधार” की ज़रूरत क्यों पड़ती है,

विश्वास-प्रणालियाँ कैसे मानसिक सहारे (scaffolding) की तरह काम करती हैं,

और क्या होता है जब निश्चितता की खोज ही भ्रम का मूल कारण बन जाती है।

यह सत्य के ख़िलाफ़ तर्क नहीं है।

यह उस प्रक्रिया की जाँच है जिसमें हम किसी चीज़ को “सच” कहते हैं।

अगर वास्तविकता के नीचे कोई फ़्लोर नहीं है,

तो सवाल यह नहीं कि हम गिरेंगे या नहीं -

सवाल यह है कि हम अब चलना कैसे सीखेंगे।

Noch keine Rezensionen vorhanden