Professor Ki Diary (Hindi Edition) Titelbild

Professor Ki Diary (Hindi Edition)

Reinhören
Dieses Angebot sichern 0,00 € - Kostenlos hören
Angebot endet am 1.12.2025 um 23:59 Uhr. Es gelten die Audible Nutzungsbedingungen.
Prime Logo Bist du Amazon Prime-Mitglied?
Audible 60 Tage kostenlos testen
Für die ersten drei Monate erhältst du die Audible Premium Mitgliedshaft für nur 0,99 € pro Monat. Dazu erhältst du ein Bonusguthaben von 15 € für Audible.de. Du wirst per Mail benachrichtigt.
Pro Monat bekommst du ein Guthaben für einen beliebigen Titel aus unserem gesamten Premium-Angebot. Dieser bleibt für immer in deiner Bibliothek.
Höre tausende enthaltene Hörbücher, Audible-Originale, Podcasts und vieles mehr.
Pausiere oder kündige dein Abo monatlich.
Aktiviere das kostenlose Probeabo und kündige monatlich und ohne Verpflichtung.
Nach dem Probemonat bekommst du eine vielfältige Auswahl an Hörbüchern, Kinderhörspielen und Original Podcasts für 9,95 € pro Monat.
Wähle monatlich einen Titel aus dem Gesamtkatalog und behalte ihn.

Professor Ki Diary (Hindi Edition)

Von: Dr. Laxman Yadav
Gesprochen von: Raja Sevak
Dieses Angebot sichern 0,00 € - Kostenlos hören

9,95 €/Monat nach 3 Monaten. Angebot endet am 1.12.2025 um 23:59 Uhr. Monatlich kündbar.

9,95 € pro Monat nach 30 Tagen. Monatlich kündbar.

Für 19,95 € kaufen

Für 19,95 € kaufen

ZEITLICH BEGRENZTES ANGEBOT. Nur 0,99 € pro Monat für die ersten 3 Monate + 15 € Audible-Guthaben. Danach 9,95 €/Monat. Bedingungen gelten. Jetzt starten.

Über diesen Titel

यह किताब डायरी, नोट्स और टिप्पणियों की शैली में अपने समय की तफ्तीश करती है। इसमें समाज और राजनीति की बड़ी परिघटनाएं हैं तो इसके बीच बनते हुए एक प्रबुद्ध नौजवान की कहानी भी है। यह आज़मगढ़ के पिछड़े किसान परिवार में पैदा होता है। इलाहाबाद और दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ायी करता है। दशक भर से ज़्यादा दिल्ली के एक कॉलेज में अध्यापन करता है। उसके कंधों पर गरीब परिवार की अपेक्षाओं और अपने सपनों का वज़न है। वह अकेला है। वह असमंजस, असुरक्षा और अनिश्चितता से घिरा हुआ है। वह डरा हुआ है। मगर वह किताबों को नौकरी पाने का जरिया नहीं बनाता, उनसे अपने समाज को समझने का नज़रिया हासिल करता है। सत्ताएँ उसे डराती हैं तो वह डरने की बजाय दुस्साहसी होता जाता है। धीरे-धीरे उसकी समझ, दायित्वबोध और लोकप्रियता का दायरा बढ़ता जाता है। वह क्लास के छात्रों से सुदूर ग्रामीण लोगों तक का प्रोफ़ेसर बन जाता है। यह फिक्शनल है, क्योंकि इसमें संज्ञाएँ बदल दी गयी हैं. यह नॉनफ़िक्शन है, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति, सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ रत्ती-रत्ती सही हैं। इसमें इसमें कथा, संवाद और सटायर है तो वक्तृता और विश्लेषण की चमक भी। इसमें वह सब है, जो एक पठनीय किताब में होना चाहिए।

Please note: This audiobook is in Hindi.

©2024 Dr. Laxman Yadav (P)2025 Audible Singapore Private Limited
Belletristik Politik True Crime
Noch keine Rezensionen vorhanden